हिनà¥à¤¦à¥€

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हिनà¥à¤¦à¥€
कà¥à¤² बोलनेवाले ४५ करोड़ (मातृभाषा)

49 करोड़ (दà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯ भाषा)

आधिकारिक सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿
भाषा कूट
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हिनà¥à¤¦à¥€ संवैधानिक रूप से भारत की पà¥à¤°à¤¥à¤® राजभाषा है और भारत की सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बोली और समà¤à¥€ जानेवाली भाषा भी है। हिनà¥à¤¦à¥€ और इसकी बोलियाठउतà¥à¤¤à¤° à¤à¤µà¤‚ मधà¥à¤¯ भारत के विविध पà¥à¤°à¤¾à¤‚तों में बोली जाती हैं । २६ जनवरी १९६५ को हिनà¥à¤¦à¥€ को भारत की आधिकारिक भाषा का दरà¥à¤œà¤¾ दिया गया।

चीनी के बाद हिनà¥à¤¦à¥€ विशà¥à¤µ में सबसे ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बोली जाने वाली भाषा है । भारत और विदेश में ६० करोड़ (६०० मिलियन) से अधिक लोग हिनà¥à¤¦à¥€ बोलते, पढ़ते और लिखते हैं । फ़िजी, मॉरिशस, गयाना, सूरीनाम की अधिकतर और नेपाल की कà¥à¤› जनता हिनà¥à¤¦à¥€ बोलती है । हिनà¥à¤¦à¥€ शबà¥à¤¦ का समà¥à¤¬à¤‚ध संसà¥à¤•ृत शबà¥à¤¦ सिनà¥à¤§à¥ से माना जाता है। 'सिनà¥à¤§à¥' सिनà¥à¤§ नदी को कहते थे ओर उसी आधार पर उसके आसपास की भूमि को सिनà¥à¤§à¥ कहने लगे। यह सिनà¥à¤§à¥ शबà¥à¤¦ ईरानी में जाकर ‘हिनà¥à¤¦à¥â€™ हिनà¥à¤¦à¥€ और फिर ‘हिनà¥à¤¦â€™ हो गया। बाद में ईरानी धीरे धीरे भारत के अधिक भागों से परिचित होते गठऔर इस शबà¥à¤¦ के अरà¥à¤¥ में विसà¥à¤¤à¤¾à¤° होता गया तथा हिनà¥à¤¦ शबà¥à¤¦ पूरे भारत का वाचक हो गया। इसी में ईरानी का ईक पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤¯ लगने से (हिनà¥à¤¦ ईक) ‘हिनà¥à¤¦à¥€à¤•’ बना जिसका अरà¥à¤¥ है ‘हिनà¥à¤¦ का’। यूनानी शबà¥à¤¦ ‘इनà¥à¤¦à¤¿à¤•ा’ या अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ शबà¥à¤¦ ‘इणà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾â€™ आदि इस ‘हिनà¥à¤¦à¥€à¤•’ के ही विकसित रूप हैं। हिनà¥à¤¦à¥€ भाषा के लिठइस शबà¥à¤¦ का पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨à¤¤à¤® पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— शरफà¥à¤¦à¥à¤¦à¥€à¤¨ यजà¥+दी’ के ‘जफरनामा’(1424) में मिलता है।

भाषाविद हिनà¥à¤¦à¥€ à¤à¤µà¤‚ उरà¥à¤¦à¥‚ को à¤à¤• ही भाषा समà¤à¤¤à¥‡ हैं । हिनà¥à¤¦à¥€ देवनागरी लिपि में लिखी जाती है और शबà¥à¤¦à¤¾à¤µà¤²à¥€ के सà¥à¤¤à¤° पर अधिकांशत: संसà¥à¤•ृत के शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करती है । उरà¥à¤¦à¥‚ फारसी लिपि में लिखी जाती है और शबà¥à¤¦à¤¾à¤µà¤²à¥€ के सà¥à¤¤à¤° पर उस पर फारसी और अरबी भाषाओं का ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ असर है । वà¥à¤¯à¤¾à¤•रणिक रà¥à¤ª से उरà¥à¤¦à¥‚ और हिनà¥à¤¦à¥€ में लगभग शत-पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ समानता है - सिरà¥à¤«à¤¼ कà¥à¤› खास कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में शबà¥à¤¦à¤¾à¤µà¤²à¥€ के सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤ (जैसा कि ऊपर लिखा गया है) में अंतर होता है। कà¥à¤› खास धà¥à¤µà¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤ उरà¥à¤¦à¥‚ में अरबी और फारसी से ली गयी हैं और इसी तरह फारसी और अरबी के कà¥à¤› खास वà¥à¤¯à¤¾à¤•रणिक संरचना भी पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— की जाती है।

[संपादित करें] परिवार

हिनà¥à¤¦à¥€ भारत योरोपीय भाषा परिवार भारोपीय भाषा परिवार के अनà¥à¤¦à¤° आती है । ये हिनà¥à¤¦ ईरानी शाखा के हिनà¥à¤¦ आरà¥à¤¯ उपशाखा के अनà¥à¤¤à¤°à¥à¤—त वरà¥à¤—ीकृत है । हिनà¥à¤¦-आरà¥à¤¯ भाषाà¤à¤ वो भाषाà¤à¤ हैं जो संसà¥à¤•ृत से उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हà¥à¤ˆ हैं । उरà¥à¤¦à¥‚, कशà¥à¤®à¥€à¤°à¥€, बंगाली, उड़िया, पंजाबी, रोमानी, मराठी न॑पाली जैसी भाषाà¤à¤ हिनà¥à¤¦-आरà¥à¤¯ भषाà¤à¤ हैं ।

[संपादित करें] इतिहास कà¥à¤°à¤®

७५० बी. सी. (ईसा पूरà¥à¤µ)- संसà¥à¤•ृत का वैदिक संसà¥à¤•ृत के बाद का कà¥à¤°à¤®à¤¬à¤¦à¥à¤§ विकास । ५०० बी. सी. - बौदà¥à¤§ तथा जैन की भाषा पà¥à¤°à¤¾à¤•ृत का विकास (पूरà¥à¤µà¥€ भारत) । ४०० बी. सी. - पाणिनि ने संसà¥à¤•ृत वà¥à¤¯à¤¾à¤•रण लिखा (पशà¥à¤šà¤¿à¤®à¥€ भारत) । वैदिक संसà¥à¤•ृत से पाणिनि की कावà¥à¤¯ संसà¥à¤•ृत का मानकीकरण ।

संसà¥à¤•ृत का उदà¥à¤—म

३२२ बी. सी. - मौरà¥à¤¯à¥‹à¤‚ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ बà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤®à¥€ लिपि का विकास। २५० बी. सी. - आदि संसà¥à¤•ृत का विकास। (आदि संसà¥à¤•ृत ने धीरे धीरे १०० बी. सी. तक पà¥à¤°à¤¾à¤•ति का सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ लिया ।) ३२० à¤. डी. (ईसवी)- गà¥à¤ªà¥à¤¤ या सिदà¥à¤§ मातà¥à¤°à¤¿à¤•ा लिपि का विकास ।

अपभà¥à¤°à¤‚श तथा आदि हिनà¥à¤¦à¥€ का विकास

४०० - कालीदास ने "विकà¥à¤°à¤®à¥‹à¤°à¥à¤µà¤¶à¥€à¤¯à¤®à¥" अपभà¥à¤°à¤‚श में लिखी। ५५० - वलà¥à¤²à¤­à¥€ के दरà¥à¤¶à¤¨ में अपभà¥à¤°à¤‚श का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤—। ७६९ - सिदà¥à¤§ सरहपद (जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हिनà¥à¤¦à¥€ का पहला कवि मानते हैं) ने "दोहाकोश" लिखी। ७७९ - उदयोतन सà¥à¤°à¥€ कि "कà¥à¤µà¤²à¤¯à¤®à¤²" में अपभà¥à¤°à¤‚श का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤—। ८०० - संसà¥à¤•ृत में बहà¥à¤¤ सी रचनायें लिखी गयीं। ९९३ - देवसेन की "शवकचर" (शायद हिनà¥à¤¦à¥€ की पहली पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•)। ११०० - आधà¥à¤¨à¤¿à¤• देवनागरी लिपि का पà¥à¤°à¤¥à¤® सà¥à¤µà¤°à¥‚प। ११४५-१२२९ - हेमचंदà¥à¤°à¤¾à¤šà¤¾à¤°à¥à¤¯ ने अपभà¥à¤°à¤‚श वà¥à¤¯à¤¾à¤•रण की रचना की।

अपभà¥à¤°à¤‚श का असà¥à¤¤ तथा आधà¥à¤¨à¤¿à¤• हिनà¥à¤¦à¥€ का विकास

१२८३ - अमीर ख़à¥à¤¸à¤°à¥‹ की पहेली तथा मà¥à¤•रियां में "हिनà¥à¤¦à¤µà¥€" शवà¥à¤¦ का सरà¥à¤µà¤ªà¥à¤°à¤¥à¤® उपयोग। १३७० - "हंसवाली" की आसहात ने पà¥à¤°à¥‡à¤® कथाओं की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ की। १३९८-१५१८ - कबीर की रचनाओं ने निरà¥à¤—à¥à¤£ भकà¥à¤¤à¤¿ की नींव रखी। १४००-१४७९ - अपभà¥à¤°à¤‚श के आखरी महान कवि रघà¥à¥¤ १४५० - रामाननà¥à¤¦ के साथ "सगà¥à¤£ भकà¥à¤¤à¤¿" की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥¤ १५८० - शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ दकà¥à¤–िनी का कारà¥à¤¯ "कालमितà¥à¤² हकायतà¥" -- बà¥à¤°à¥à¤¹à¤¨à¥à¤¦à¥à¤¦à¤¿à¤¨ जनम दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾à¥¤ १५८५ - नवलदास ने "भकà¥à¤¤à¤¾à¤®à¤²" लिखी। १६०१ - बनारसीदास ने हिनà¥à¤¦à¥€ की पहली आतà¥à¤®à¤•था "अरà¥à¤§ कथानकà¥" लिखी। १६०४ - गà¥à¤°à¥ अरà¥à¤œà¥à¤¨ देव ने कई कवियों की रचनाओं का संकलन "आदि गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥" निकाला। १५३२ -१६२३ गोसà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ तà¥à¤²à¤¸à¥€à¤¦à¤¾à¤¸ ने "रामचरित मानस" की रचना की। १६२३ - जाटमल ने "गोरा बादल की कथा" (खडी बोली की पहली रचना) लिखी। १६४३ - रामचनà¥à¤¦à¥à¤° शà¥à¤•à¥à¤² ने "रीति" के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ कावà¥à¤¯ की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ की। १६४५ - उरà¥à¤¦à¥‚ की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥¤

आधà¥à¤¨à¤¿à¤• हिनà¥à¤¦à¥€

१७९६ - देवनागरी रचनाओं की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ छà¥à¤ªà¤¾à¤ˆà¥¤ १८२६ - "उदनà¥à¤¤ मारà¥à¤¤à¤£à¥à¤¡" हिनà¥à¤¦à¥€ का पहला सापà¥à¤¤à¤¾à¤¹à¤¿à¤•। १८३७ - ओमॠजय जगदीश" के रचयिता शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤°à¤¾à¤® फà¥à¤²à¥à¤²à¥Œà¤°à¥€ का जनà¥à¤® । १८७७ - अयोधà¥à¤¯à¤¾ पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦ खतà¥à¤°à¥€ का हिनà¥à¤¦à¥€ वà¥à¤¯à¤¾à¤•रण,(बिहार बनà¥à¤§à¥ पà¥à¤°à¥‡à¤¸) 1950 - हिनà¥à¤¦à¥€ भारत की राजभाषा के रà¥à¤ª में सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤à¥¤ 2000 -